रविवार, 22 जनवरी 2012

समय और हम

समय तेजी से गुजर जाता है और जब हम पीछे देखते हैं तो विश्वास ही नही होता कि हम ने इतनी दूरी तय कर ली है। इस भागती दौड़ती दुनिया में हमारा अतीत ही ठहरा रहता है, और जितनी दूर हम अतीत से दूर होते चले जाते हैं उतना ही जल्दी समय भागता नजर आता है। यह जो समय को उल्टा घूमाने की परिकल्पना है वह इसी भागते समय को रोकने की एक ख्वाहिश है। हमें कभी कभार समय के गुजरने का भी ख्याल नहीं रहता, ऐसा लगता है कि समय एक फ्रेम में जड़ दिया गया है और पल पल एक वर्ष सा प्रतीत होता है। अति सुखद या दुखद क्षण में ऐसा प्रतीत होता है। फिर समय का कोई अस्तित्व नहीं है क्या ? समय शायद हमारी काल्पनिक उपज है। जो है उसी को समय माने और अपनी ओर से बहुत कुछ करने की संभावना की तलाश करें।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें