गुरुवार, 1 सितंबर 2011

अन्ना- महानायक

अन्ना जी पर इतना लिख बोल लिया कि पाठक श्रोता दोनों ही अघा गए. दोस्तों, अन्ना जी एक दिन में अन्ना नहीं बन गए. उनके पीछे जनम भर की तपस्या है. वे जितना बाहर के भ्रष्टाचार से लड रहे हैं, उतना ही अपने आचार-विचार में तालमेल बनाने के लिए लडते हैं. उनका जीवन प्रतिपल तलवार की धार पर चलने जैसा है. उनकी निम्न बातों को अपनाने की कोशिश की जानी चाहिए:-

१. आचरण विचार की शुद्धता
२. मन को संयमित रखने का प्रयास
३. अपना थोडा समय देश के उत्थान के लिए देना
४. सादगी को जीवन में उतारने का प्रयास
५. थोडे शब्दों में ही सार्थक बातें बतलाना

अन्ना जी युवाओं के प्यारे हैं, क्योंकि उन्होंने उपदेश का रास्ता छोड कर अपने स्वकर्म पर ध्यान दिया. वे अन्दर बाहर एक से हैं.

आइए हम सब मिलजुल कर मनसा वचसा कर्मणा को शुद्ध बनाएं.

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